उपकरण दान योजना के लिए दिशानिर्देश

उपकरण दान योजना के लिए दिशानिर्देश

उपकरण दान योजना के लिए दिशानिर्देश

 

परिचय

भारत सरकार, स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय, नई दिल्‍ली द्वारा 1985 में यह निर्णय लिया गया था कि भारत में मरीज देखभाल और सतत् चिकित्‍सा शिक्षा में, यूएसए में रह रहे भारतीय चिकित्‍सकों की सेवाओं का उपयोग किया जाए। भारत में चिकित्‍सकों की अमेरीकन एसोसिएशन (एएपीआई), यूएसए द्वारा आरंभ की गई, भारत में चिकित्‍सा संस्‍थानों को चिकित्‍सा उपकरणों के दान की एक योजना अनुमोदित की गई थी। भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद् (एमसीआई), नई दिल्‍ली को, भारत में इस योजना का समन्‍वय करने के लिए नोडल एजेंसी के रूप में नामजद किया गया था। एएपीआई, यूएसए के साथ इस योजना के सफल कार्यान्‍वयन के कारण, यूके और कनाडा से भारतीय डाक्‍टरों को भी शामिल करने के लिए केंद्र सरकार, स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय द्वारा उक्‍त योजना 1993 में विस्‍तारित कर दी गई है।

स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं महानिदेशालय ने, इस योजना के अंतर्गत दान किए गए सभी उपकरणों/ पुस्‍तकों और जर्नलों के लिए सीमा शुल्‍क की छूट प्रदान करने पर सहमति व्‍यक्‍त कर दी है। भारतीय जहाजरानी निगम और एयर इंडिया ने, कार्गो में स्‍थान की उपलब्‍धता की शर्त के अधीन परिवहन प्रभारों की 100 प्रतिशत छूट के लिए सहमति व्‍यक्‍त की है। उपकरणों की पैकेजिंग और प्रेषण, दानकर्ता की जिम्‍मेदारी होगी।

इस योजना के अंतर्गत अनेक उपयोगी उपकरण और जर्नल प्राप्‍त किए गए हैं। यह अपेक्षा की जाती है कि देश में सभी चिकित्‍सा संस्‍थान इस योजना से लाभान्वित हो सकते हैं।

 

दानकर्ताओं के लिए दिशानिर्देश

  1. भारतीय संस्‍थानों को चिकित्‍सा उपकरण, पुस्‍तकें और जर्नल आदि दान करने के इच्‍छुक यूएसए/यूके/कनाडा में दानकर्ताओं के लिए यह आवश्‍यक है कि वे अपने देशों में भारतीय उच्‍चायोग/भारतीय दूतावास से सम्‍पर्क करें।
  2. यह निर्णय लिया गया है कि 25,000 पौंड से कम मूल्‍य के उपकरण या ऐसे उपकरण स्‍वीकार न किए जाएं जो भारत में विनिर्मित या उपलब्‍ध हैं। तथापि, यदि कोई विशेष उपकरण भारत में विनिर्मित/उपलब्‍ध नहीं हैं और यह अत्‍यधिक उपयोगी है तो इसे स्‍वीकार किया जा सकता है, चाहे इसका मूल्‍य उपर्युक्‍त धनराशि से कम भी हो।
  3. यूएसए/यूके/कनाडा में इस्‍तेमाल से बाहर नहीं होना चाहिए।
  4. पुस्‍तकों और जर्नलों के केवल अद्यतन संस्‍करण ही स्‍वीकार किए जाएंगे।
  5. दानकर्ताओं द्वारा उपकरण और हिस्‍सो-पुर्जों के संबंध में पूरी सूचना उपलब्‍ध कराई जानी चाहिए जैसे उपकरण की लागत, विनिर्माता का नाम, तकनीकी ब्‍योरे, विनिर्माण की तारीख आदि। विवरणात्‍मक कैटलॉग/ तकनीकी साहित्‍य संलग्‍न किया जाए (परिशिष्‍ट-।)
  6. संबंधित तकनीकी व्‍यक्तियों से, प्रत्‍येक उपकरण की कार्यचालन दशा और कम से कम 4-5 वर्ष के शेल्‍फ जीवन का एक प्रमाणपत्र प्राप्‍त किया जाना चाहिए और उपर्युक्‍त ब्‍योरों के साथ संलग्‍न किया जाना चाहिए।
  7. 220 वाल्‍ट : 50 एचजैड की पावर लाइन पर भारत में उपकरण का इस्‍तेमाल करना संभव होना चाहिए।

 

भारत के उच्‍चायोग/ भारतीय दूतावास द्वारा उपलब्‍ध कराई जाने वाली सहायता

यूएसए/यूके/कनाडा में भारत का उच्‍चायोग/भारतीय दूतावास, इस उद्देश्‍य के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए एक प्रपत्र (परिशिष्‍ट-।) पर, दान की गई मदों के बारे में आवश्‍यक सूचना प्राप्‍त करेगा और चिकित्‍सा उपकरणों, पुस्‍तकों और जर्नलों के दान के सभी प्रस्‍ताव प्राप्‍त करेगा। दानकर्ता उन अस्‍पतालों या मेडिकल कॉलजों के नामों का सुझाव दे सकते हैं जहां उनके द्वारा दान की गई मदें भेजी जा सकती हैं। यह सूचना, प्रस्‍ताव का मूल्‍यांकन करने और अगली आवश्‍यक कार्रवाई के लिए भारतीय उच्‍चायोग/ भारतीय दूतावास द्वारा भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद् को भेजी जाएगी। भारतीय उच्‍चायोग/ भारतीय दूतावास, भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद् द्वारा दी गई सूचना के अनुसार भारत में विभिन्‍न चिकित्‍सा संस्‍थानों को एयर इंडिया या भारतीय जहाजरानी निगम के जरिए कंसाइनमेंट के परिवहन की व्‍यवस्‍था करेगा।

 

भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद् की जिम्‍मेदारी

भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद् का पता निम्‍नलिखित है:-

भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद्

पॉकेट-14, सेक्‍टर-8, द्वारका फेज-।,

नई दिल्‍ली – 110 075

दूरभाष : 25367033, 25367035, 2367036, 25367037,

फैक्‍स नं. 25367025

भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद्, ऐसे अस्‍पताल या मेडिकल कॉलेज निर्धारित करेगी, जो उपकरण प्राप्‍त करेंगे और भारतीय दूतावास/ भारतीय उच्‍चायोग तथा संबंधित दानकर्ता को सूचित करेंगे। यह उपकरण और प्राप्‍तकर्ता संस्‍थानों के ब्‍योरों के संबंध में आवश्‍यक सूचना प्राप्‍त करेगी।

परिषद् यह भी सुनिश्चित करेगी कि क्‍या प्राप्‍तकर्ता संस्‍थान को इस विशेष उपकरण की आवश्‍यकता है, क्‍या उसके पास इस उपकरण के रखरखाव के लिए आवश्‍यक स्‍टाफ और अवसंरचना है और क्‍या सर्विसेज की सुविधाएं और हिस्‍से-पुर्जे भारत में उपलब्‍ध हैं। संस्‍थानों को, स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं महानिदेशालय से सीमाशुल्‍क छूट प्रमाणपत्र और इस योजना के अंतर्गत अन्‍य सुविधाएं प्राप्‍त करने के संबंध में सूचित किया जाएगा।

जैसे ही संबंधित संस्‍थान से उपकरण की प्राप्ति से संबंधित सूचना प्राप्‍त होती है, परिषद्, संबंधित दानकर्ता, यूएसए/यूके/कनाडा में भारतीय उच्‍चायोग/ भारतीय दूतावास में नोडल अधिकारी और स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय को सूचित करेगी।

 

स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं महानिदेशालय (डीजीएचएस) के लिए दिशानिर्देश

स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं उप महानिदेशक (मेडिकल), स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं महानिदेशक, निर्माण भवन, नई दिल्‍ली ऐसा प्राधिकारी है, जिसे विदेश में दान किए गए उपकरण के संबंध में सीमाशुल्‍क से छूट से संबंधित सभी संदर्भ संबोधित किए जाएंगे। भारत सरकार द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि इस योजना के अंतर्गत दान किए गए सभी उपकरणों के लिए सीमाशुल्‍क छूट प्रमाणपत्र प्रदान किया जाए। सरकारी अस्‍पतालों के लिए अब यह आवश्‍यक नहीं है कि वे अलग-अलग कंसाइनमेंटों पर सीमाशुल्‍क छूट प्रमाणपत्र के लिए स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं महानिदेशालय के पास जाएं। तथापि, स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं महानिदेशालय से संस्‍थान के संबंध में एकबारगी अनुमोदन की ही आवश्‍यकता है। परोपकारी अस्‍पतालों के मामले में, स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं महानिदेशालय से अलग-अलग उपकरणों के लिए अनुमोदन आवश्‍यक है।

प्राप्‍तकर्ता संस्‍थानों के लिए दिशानिर्देश

  1. भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद् को निम्‍नलिखित सूचना भेजी जानी होगी:-

क्‍या संस्‍थान को विशेष उपकरण (उपकरणों) की आवश्‍यकता है।

उपकरण का रखरखाव करने के लिए आवश्‍यक स्‍टाफ और अवसंरचना की उपलब्‍धता।

उनके क्षेत्र में या भारत में अन्‍यत्र हिस्‍सों-पुर्जों और सर्विस सुविधाओं की उपलब्‍धता।

  1. प्राप्‍तकर्ता संस्‍थान को एक स्‍पष्‍ट वचनपत्र देना होगा कि वह आयात लाइसेंस, सीमाशुल्‍क निपटान और एयर इंडिया/ भारतीय जहाजरानी निगम के जरिए यूएसए/यूके/कनाडा से उपकरण के परिवहन जैसी उपकरण के आयात हेतु सभी औपचारिकताओं का ध्‍यान रखेगा। उपकरण की सुपुर्दगी प्राप्‍त करना भी संस्‍थान की जिम्‍मेदारी होगी।
  2. दान दिया गया उपकरण स्‍वीकार करने के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद् द्वारा दानकर्ता और प्राप्‍तकर्ता संस्‍थानों की पहचान और अनुमोदन कर लेने के पश्‍चात, प्राप्‍तकर्ता संस्‍थान को निम्‍नलिखित तरीके से सीमाशुल्‍क छूट के लिए आवेदन करना चाहिए:

 

यदि प्राप्‍तकर्ता संगठन किसी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध है या कोई अनुमोदित अनुसंधान संस्‍थान है तो संस्‍थान प्रमुख द्वारा अपना आवेदनपत्र, सहायक महानिदेशक (चिकित्‍सा शिक्षा), स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं महानिदेशालय, ‘ए’विंग, निर्माण भवन, नई दिल्‍ली-110011 को भेजा जाना चाहिए।

यदि प्राप्‍तकर्ता संगठन किसी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध न होने वाले अस्‍पताल और नैदानिक केंद्र हैं तो इन संस्‍थान प्रमुखों द्वारा अपने आवेदनपत्र सहायक महानिदेशक (चिकित्‍सा), स्‍वास्‍थ्‍य सेवा महानिदेशालय, ‘ए’विंग, निर्माण भवन, नई दिल्‍ली-110011 को भेजे जाने चाहिए।

यदि प्राप्‍तकर्ता संस्‍थान, केंद्र सरकार, राज्‍य सरकार, म्‍युनिसिपल प्राधिकरणों, स्‍वायत्‍त प्राधिकरणों या कानून द्वारा स्‍थापित उपर्युक्‍त एजेंसियों या संगठनों के पूर्ण नियंत्रणाधीन पंजीकृत निकायों से संबंधित अध्‍यापन और गैर-अध्‍यापन संस्‍थान हैं तो उन्‍हें वित्‍त मंत्रालय की दिनांक 01.03.1988 की अधिसूचना संख्‍या 63/88 के अंतर्गत एकबारगी प्रमाणपत्र के लिए क्रमश: ऊपर (क) और (ख) पर यथा उल्लिखित संबंधित प्राधिकरण को आवेदन करना चाहिए।

यदि प्राप्‍तकर्ता संगठन परोपकारी या अर्ध-परोपकारी संगठन हैं तो उन्‍हें अपने आवेदनपत्र अपनी स्थिति के बारे में राज्‍य सरकार से एक प्रमाणपत्र के साथ भेजने चाहिए, यदि उन्‍हें पहले ही ऊपर (ख) और (ग) पर यथाउल्लिखित प्राधिकरण के अनुमोदित परोपकारी अस्‍पतालों की सूची में शामिल नहीं किया गया है। ऐसे सभी मामलों में प्राथमिकता के आधार पर सीडीईसी जारी किया जाएगा, जहां दान किया गया उपकरण, भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद् के जरिए पहले ही अनंतिम रूप से स्‍वीकार कर लिया गया है।

आमतौर पर कार्रवाई शीघ्रता से की जाती है। तथापि, किसी कठिनाई या समस्‍या के मामले में उन्‍हें संबंधित स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं सहायक महानिदेशक या उप महानिदेशक (चिकित्‍सा) से संपर्क करना चाहिए।

  1. स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं महानिदेशालय से सीमाशुल्‍क छूट प्रमाणपत्र प्राप्‍त करने के लिए प्रपत्र, संलग्‍न है (परिशिष्‍ट-।।)। आवेदनपत्र के साथ संलग्‍न किए जाने वाले दस्‍तावेज़, जो संबंधित राज्‍य सरकार के माध्‍यम से भेजे जाएंगे, निम्‍नलिखित हैं:-

संस्‍थान के पंजीकरण की प्रति।

प्रभारों की अनुसूची।

प्रमुख उपकरणों की माल-सूची।

प्रोफार्मा इनवॉयस (8 प्रतियां)।

डीजीटीडी से प्राप्तियोग्‍य एनएमआईसी।

राज्‍य सरकार से 5 पॉइंट/8 पॉइंट प्रमाणपत्र।

  1. विनिर्माताओं द्वारा विनिर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार उपकरण के स्रोत पर जहाज से उतारने से कंसाइनमेंट का परिवहन, संस्‍थान और अनुरक्षण प्राप्‍तकर्ता संस्‍थान की जिम्‍मेदारी होगी।
  2. उपकरण प्राप्‍त कर लिए जाने पर संस्‍थान द्वारा तुरंत भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद् और दानकर्ता को सूचित किया जाना चाहिए।

 

 

 

परिशिष्‍ट-।

उपकरण दान कार्यक्रम के अंतर्गत भारत को दान के प्रस्‍ताव भेजने के लिए प्रपत्र (यदि स्‍थान पर्याप्‍त नहीं है तो कृपया अतिरिक्‍त शीटें लगाएं)

 

  1. क. दानकर्ता का नाम : …………………………………………………

ख. पता : …………………………………………………………………

ग. दूरभाष – कार्य : …………………………………………………….

घ. निवास स्‍थान : ……………………………………………………..

  1. क. उपकरण का नाम : ……………………………………………….

ख. विनिर्माता : …………………………………………………………

ग. मॉडल नंबर : ……………………………………………………….

घ. उपकरण की लागत अमरीकी डालर में : ………………………

ङ. तकनीकी ब्‍योरे : ……………………………………………………

च. विनिर्माण का वर्ष : ………………………………………………..

छ. वर्तमान स्थिति : ………………………….. (प्रमाणपत्र संलग्‍न किया जाए)

ज. भारत में एजेंट का नाम : ……………………………………….

झ. भेजे गए हिस्‍से–पुर्जे/सहायक पुर्जे : …………………………….

(संख्‍या)

ञ. शामिल किया गया कैटलॉग/साहित्‍य : ………………………..

  1. क. अस्‍पताल/मेडिकल कॉलेज का नाम : ……………………………………., जिसमें उपकरण भेजा जाना है:

ख. पता : …………………………………………………………………

पैकेजों की संख्‍या : …………………………………………………

प्रत्‍येक का गंतव्‍य स्‍थान

पैकेज :

पैकेज संख्‍या 1 …………………………………

पैकेज संख्‍या 2 …………………………………

पैकेज संख्‍या 3 …………………………………

पैकेज संख्‍या 4 …………………………………

ग. प्रत्‍येक पैकेज का भार :

पैकेज संख्‍या 1 …………………………………

पैकेज संख्‍या 2 …………………………………

पैकेज संख्‍या 3 …………………………………

पैकेज संख्‍या 4 …………………………………

 

घ. प्रत्‍येक पैकेज में मदों की सूची :

पैकेज संख्‍या 1 …………………………………

पैकेज संख्‍या 2 …………………………………

पैकेज संख्‍या 3 …………………………………

पैकेज संख्‍या 4 …………………………………

ङ  उस प्रतिनिधि का नाम जो यूएसए में कंसाइनमेंट सौंपेगा ……………….

 

……………………………………….. दिनांक हस्‍ताक्षर

 

 

 

परिशिष्‍ट-।।

सीमा शुल्‍क छूट प्रमाणपत्र प्राप्‍त करने के लिए अस्‍पताल/मेडिकल कॉलेज/संस्‍थानों/अनुसंधान केंद्रों द्वारा भरा जाने वाला प्रपत्र (दो प्रतियों में)

 

आवेदनपत्र संख्‍या ………………………….

दिनांक ……………………………………….

  1. संस्‍थान/अस्‍पताल/मेडिकल कॉलेज का नाम, पते के साथ :
  2. क्‍या संस्‍थान निम्‍नलिखित द्वारा संचालित है-
    • राज्‍य सरकार
    • स्‍थानीय निकाय
    • परोपकारी/निजी न्‍यास, स्‍वैच्छिक संगठन/सरकारी सहायता प्राप्‍त या अन्‍यथा
  3. आवेदक संस्‍थान/मेडिकल कॉलेजों/अस्‍पताल आदि के लिए:

 

  • पिछले तीन कैंलेंडर वर्षों (वर्ष-वार) में ओपीडी में आए और नि:शुल्‍क उपचार किए गए मरीजों की संख्‍या
वर्ष संख्‍या उपचार किए गए मरीजों की कुल संख्‍या नि:शुल्‍क उपचार किए गए मरीजों का प्रतिशत नि:शुल्‍कमरीजों का प्रतिशत

 

  • मरीजों को ओपीडी में नि:शुल्‍क उपचार कराई गई सुविधाओं/ सेवाओं के ब्‍योरे

 

  1. बिस्‍तरों की संख्‍या, बिस्‍तरों के अलग-अलग विवरण के साथ (विशेषज्ञता-वार) 5. 500/- रुपए प्रति मास से कम आय वाले परिवारों से संबंधित मरीजों के लिए आरक्षित नि:शुल्‍क बिस्‍तरों की संख्‍या 6. मरीजों को नि:शुल्‍क उपलब्‍ध कराई जा रही सेवाओं के ब्‍योरे 7. भुगतान करने वाले मरीजों से लिए जाने वाले प्रभारों की अनुसूची क्‍या है और उसके ब्‍योरे 8. संस्‍थान के पास उपलब्‍ध प्रमुख उपकरणों की माल-सूची
  2. आयात किए जाने वाले उपकरणों का विवरण :
क्रम सं. विवरण मात्रा उत्‍पत्ति का देश/स्‍थान

 

  1. संस्‍थान प्रमुख द्वारा विधिवत् हस्‍ताक्षरित तीन प्रतियों में प्रोफार्मा इनवॉयसों की फोटोस्‍टेट प्रतियां :
  2. उपकरणों, औज़ारों/ अतिरिक्‍त हिस्‍सों-पुर्जों आदि का विवरणात्‍मक कैटलॉग/ तकनीकी साहित्‍य
  3. देश के भाग के नाम के साथ-साथ उपकरणों की प्राप्ति की अनुमानित तारीख और परिवहन का तरीका (हवाई जहाज द्वारा या पोत द्वारा)
  4. उस विभाग का नाम, जिसके लिए उपकरण अपेक्षित है
  5. औचित्‍य के साथ वह उद्देश्‍य जिसके लिए उपकरण का इस्‍तेमाल किया जाएगा या संस्‍थापित किया जाएगा (मरीजों के स्‍कैन के लिए)
  6. विनिर्माता का नाम
  7. क्‍या उपकरण का आयात सीधे किया गया है या डीजीएसऐण्‍डडी के माध्‍यम से?
  8. क. यदि डीजीएसऐण्‍डडी के जरिए किया गया है तो मांग-पत्र संख्‍या और तारीख दें

ख. यदि एजेंट के जरिए आदेश दिया गया है तो एजेंट का पता दें और आयात लाइसेंस संख्‍या तथा तारीख दें

  1. दर्शाएं कि क्‍या उपकरण निम्‍नलिखित के लिए है:-
    1. मरीजों की देखभाल
    2. अनुसंधान
  2. क्‍या इसी प्रकार के उपकरण का आयात शुल्‍कमुक्‍त आधार पर किया गया है, यदि हां तो उसके ब्‍योरे दें। संख्‍या.
  3. क्‍या स्‍वदेशी दृष्टिकोण से आयात किए जाने वाले उपकरण के लिए एनएमआईसी (भारत में विनिर्मित नहीं का प्रमाणपत्र) अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्‍त किया गया है, यदि हां तो यह या विधिवत् पृष्‍ठांकित इसकी फोटोस्‍टेट प्रति संलग्‍न करें।
  4. क्‍या उपकरण/यंत्र/अतिरिक्‍त हिस्‍से पुर्जे/ संघटक पुर्जे और सहायक पुर्जे, जिन पर सीमा शुल्‍क छूट आवश्‍यक है, उपयोज्‍य हैं या गैर-उपयोज्‍य।
    1. उपयोज्‍य मदों के लिए, कृपया उनके ब्‍योरे दर्शाएं
  5. क्‍या कंपनी में बिक्री उपरांत सेवा सुविधाएं उपलब्‍ध हैं, यदि हां तो फर्म/एजेंट का नाम और पता
  6. क्‍या उपकरण/औज़ार/यंत्र, विदेश से कोई उपहार है, यदि हां तो मूल रूप में दानकर्ता का पत्र या विधिवत् प्रतिहस्‍ताक्षरित फोटोस्‍टेट प्रति संलग्‍न करें।
  7. क्‍या आप विदेश में दान के रूप में निधियां प्राप्‍त करने के उद्देश्‍य के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की अनुमति से विदेश में कोई खाता रख रहे हैं (यदि उपकरण, विदेशी मुद्रा में, विदेश से प्राप्‍त दान से खरीदा जाना है)
  8. यदि उपकरण का आयात, दिनांक 26.03.81 की अधिसूचना संख्‍या 70 के अनुसार अनुसंधान उद्देश्‍यों के लिए किया जा रहा है तो निम्‍नलिखित दस्‍तावेज़ प्रस्‍तुत किए जाएं:
    1. अनुसंधान परियोजना के संक्षिप्‍त ब्‍योरे
    2. क्‍या आईसीएमआर की अनुसंधान परियोजना के अंतर्गत या किसी अन्‍य राष्‍ट्रीय और अंतर्राष्‍ट्रीय एजेंसी के अधीन कोई अनुसंधान किया जा रहा है? कृपया संगठन का नाम का उल्‍लेख करें।
    3. राज्‍य सरकार के स्‍वास्‍थ्‍य विभाग से, उपर्युक्‍त अधिसूचना के अनुसार यथाविचारित प्रमाणपत्र कि:
  9. यह संस्‍थान किसी वाणिज्यिक क्रियाकलाप में लगा हुआ नहीं है।
  10. आयातित उपकरण का उपयोग केवल अनुसंधान उद्देश्‍य के लिए किया जाएगा।
  11. मामले के समर्थन में कोई अन्‍य सुसंगत सूचना

 

घोषणापत्र

प्रमाणित किया जाता है कि उपर्युक्‍त सूचना हर प्रकार से सही और पूर्ण है और संस्‍थान में उपर्युक्‍त उपकरण का उपयोग किया जाएगा, भारत सरकार के अनुमोदन के बिना इसे हटाया या बेचा नहीं जाएगा।

यह भी प्रमाणित किया जाता है कि उपर्युक्‍त उपकरण का उपयोग, उन मरीजों के संबंध में प्रभारमुक्‍त किया जाएगा, जो प्रपत्र के पैरा (4) और (6) के अनुसार नि:शुल्‍क उपचार के हकदार हैं और भुगतान करने वाले मरीजों से उन्‍हीं दरों पर प्रभार लिया जाएगा, जो उपकरण/यंत्र आदि के लागत मूल्‍य को ध्‍यान में रखते हुए निर्धारित की गई हैं।

हस्‍ताक्षर

न्‍यासी अध्‍यक्ष

संस्‍थान प्रमुख का नाम, मुहर सहित

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