सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम के लिए दिशानिर्देश

सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम के लिए दिशानिर्देश

सतत् चिकित्‍सा शिक्षा स्‍कीम के लिए दिशानिर्देश

 

स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय, भारत सरकार के परामर्श से 1985 में यह निर्णय लिया गया था कि भारत में मरीज देखभाल और सतत् चिकित्‍सा शिक्षा में, संयुक्‍त राज्‍य अमेरिका में बसे भारतीय चिकित्‍सकों की सेवाओं का उपयोग किया जाए।

तब दो स्‍कीमों की योजना बनाई गई थी:

  1. सतत् चिकित्‍सा शिक्षा स्‍कीम।
  2. उपकरण दान स्‍कीम।

इन स्‍कीमों में सहयोग करने के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद् को नोडल एजेंसी नामित किया गया था और इस उद्देश्‍य के लिए दिसंबर, 1985 में परिषद् के कार्यालय में एक सतत् चिकित्‍सा शिक्षा एकक स्‍थापित किया गया था। यू.के. से भारतीय डाक्‍टरों को शामिल करने के लिए केंद्र सरकार, स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय द्वारा इन स्‍कीमों का विस्‍तार किया गया और भारत में विभिन्‍न संस्‍थानों के साथ-साथ संयुक्‍त राज्‍य अमेरिका, यू.के. और कनाडा में भारतीय डाक्‍टरों की एसोसिएशन के सहयोग से परिषद् के तत्‍वावधान में इस योजना के अंतर्गत कनाडा को भी रखा गया है। ये सभी बहुत सफल रहे हैं और हर वर्ष निरंतर आधार पर ऐसे अधिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने की मांग बढ़ती है।

इसके अलावा, नवंबर 1999 में केंद्र सरकार, स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय ने, यूएसए/ यूके/ कनाडा से गैर-निवासी संकाय सदस्‍य की सहभागिता के बिना सतत् चिकित्‍सा शिक्षा कार्यक्रम आयोजित करने के लिए अपने अनुमोदन का विस्‍तार भी कर दिया है।

 

सतत् चिकित्‍सा शिक्षा कार्यक्रमों की संख्‍या

 

  1. प्रति वर्ष होने वाले कार्यक्रमों की संख्या

वर्ष 1985-86 के दौरान आयोजित किए गए आरंभिक 4 कार्यक्रमों के साथ, कार्यक्रमों की संख्‍या प्रति वर्ष उत्‍तरोत्‍तर बढ़ाकर 100 से 150 कर दी गई है।

  1. सतत् चिकित्‍सा शिक्षा के लिए विषयों का चयन

जिन विधाओं में कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं, उन्‍हें, भारत में इन कार्यक्रमों के अनुरोध, यूएसए/यूके/कनाडा में तदनुरूपी विधा में संकाय सदस्‍यों की उपलब्‍धता, यदि अपेक्षित हो, पर निर्भर करते हुए परिषद् द्वारा अंतिम रूप दिया जाता है।

  1. मेजबान संस्‍थानों की जिम्‍मेदारी

विदेशी संकाय नेता के परामर्श से कार्यक्रमोंके लिए तारीखों और विषयों को अंतिम रूप देना।

कार्यक्रम आयोजित करने की सभी व्‍यवस्‍थाएं करना।

स्‍थानीय संकाय नेता के विवेकाधिकार पर भारतीय संकाय सदस्‍यों और अन्‍य व्‍यक्तियों को निमंत्रण पत्र भेजना।

दौरा करने वाले अनिवासी भारतीय/ विदेशी/ भारतीय संकाय सदस्‍यों के ठहरने और यदि आवश्‍यक हो, उनकी आंतरिक यात्रा की व्‍यवस्‍थाएं करना।

दौरा करने वाले संकाय सदस्‍यों और यथा अपेक्षित अन्‍य प्रतिनिधियों के ठहरने की व्‍यवस्‍था करना।

कार्यक्रम की तारीखों से कम से कम तीन महीने पहले सभी चिकित्‍सा संस्‍थानों को वितरण हेतु, अंतिम रूप दिए गए कार्यक्रम की विवरणिका परिषद् को भेजना। आयोजकों द्वारा सामना की गई समस्‍याएं और सुधार के लिए सुझाव भी भेजे जाने आवश्‍यक हैं।

कार्यक्रम से पहले समय पर सभी संकाय सदस्यों से सार और पाण्डुलिपि मंगवाना।

कार्यक्रम की कार्यवाही प्रकाशित करना और देश में सभी चिकित्‍सा संस्‍थानों तथा परिषद् को प्रतियां वितरित करना।

दौरा करने वाले विदेशी संकाय सदस्‍यों के आतिथ्‍य और कार्यक्रम की कार्यवाही के प्रकाशन के प्रति किए गए व्‍यय के वास्‍तविक बिल प्रतिपूर्ति हेतु परिषद् को भेजना।

  1. विदेशी संकाय सदस्‍यों की जिम्‍मेदारी

विदेशी संकाय सदस्‍य, यूएसए/यूके/कनाडा से भारत आने और वापस जाने के अपने स्‍वयं यात्रा खर्चे वहन करेंगे।

संकाय सदस्‍य नेता को, कार्यक्रम में भाग लेने के लिए अधिक से अधिक पांच संकाय सदस्‍यों की पहचान करनी होगी और ये सदस्‍य तदनुरूपी विधा में अनुभव वाले वरिष्‍ठ व्‍यवसायविद होने चाहिए।

उनके कॅरिकुलम विटाए के साथ, दौरा करने वाले संकाय सदस्‍यों की एक संपूर्ण सूची, संकाय को अंतिम रूप दे दिए जाने पर, मूल्‍यांकन हेतु परिषद् को भेजी जाएगी।

स्‍थानीय संकाय सदस्‍य नेता के परामर्श से कार्यक्रम की तारीखें और विषय को अंतिम रूप दिया जाना आवश्‍यक है।

विभिन्‍न कार्यक्रमों के लिए तारीखों का विस्‍तार पूरे वर्ष में किया जाना चाहिए, यदि संभव हो।

संकाय सदस्‍य नेता, अपने सुझाव, यदि कोई हों, कार्यक्रम के ब्‍योरों के संबंध में अपनी रिपोर्ट भेज सकता है।

संकाय सदस्‍य नेता, दौरा करने वाले सभी संकाय सदस्‍यों से अनुरोध कर सकता है कि वे, कार्यक्रम आयोजित किए जाने से पहले स्‍थानीय कार्यक्रम आयोजकों को सार और पाण्‍डुलिपि भेजें।

  1. परिषद् की जिम्‍मेदारियां

सतत् चिकित्‍सा शिक्षा कार्यक्रमों की विधाओं और स्‍थानों का चयन ।

समस्‍याओं, यदि कोई हों, का समाधान निकालते हुए, कार्यक्रम को अंतिम रूप देने के लिए मेजबान संस्‍थानों और विदेशी संकाय सदस्‍यों के बीच विचार-विमर्श।

दौरा करने वाले विदेशी संकाय सदस्‍य को अधिकाधिक निमंत्रण भेजना।

सभी चिकित्‍सा संस्‍थानों/उपचार सेवाओं को विज्ञप्तियां भेजना और कार्यक्रम में अधिकतम सहभागिता और व्‍यापक प्रचार के लिए समय से देश में अग्रणी पत्रिकाओं में विज्ञपत्यिां देना।

सतत् चिकित्‍सा शिक्षा कार्यक्रम के मेजबान संस्‍थान से कार्यक्रम की विस्‍तृत रिपोर्ट, मूल्‍यांकन विश्‍लेषण और कार्यक्रम की कार्यवाही प्राप्‍त करना।

दौरा करने वाले विदेशी संकाय सदस्‍य को सहभागिता का प्रमाणपत्र जारी करना, यदि परिषद् द्वारा पहचान की गई हो।

  1. वित्‍तीय सहायता

नियमानुसार, परिषद्, विकल्‍पों (क) और (ख) के अंतर्गत दिए गए अलग-अलग विवरण के अनुसार वित्‍तीय सहायता उपलब्‍ध कराती है; इसलिए सतत् चिकित्‍सा शिक्षा कार्यक्रम को मेजबान संस्‍थान, निम्‍नलिखित में से केवल एक विकल्‍प चुन सकता है, जो लागू होता हो। विकल्‍प (क) अनिवासी संकाय सदस्‍य सहभागिता के साथ आयोजित किए जाने वाले सतत् चिकित्‍सा शिक्षा कार्यक्रम के लिए :

यह परिषद् कार्यक्रम की कार्यवाही के प्रकाशन के लिए और विदेशी संकाय सदस्‍य, यदि कोई हो, सहित दौरा करने वाले अनिवासी संकाय सदस्‍य के भोजन और ठहरने तथा आंतरिक यात्रा व्‍यय पूरे करने के लिए यूएसए/यूके/कनाडा के अनिवासी संकाय सदस्‍यों की सहभागिता वाले सतत् चिकित्‍सा शिक्षा कार्यक्रमों के मेजबान संस्‍थानों को अधिकतम 1.00 लाख रुपए तक की वित्‍तीय सहायता उपलब्‍ध करा सकती है। तथापिकोई संस्‍थान, केवल कार्यक्रम की कार्यवाही के प्रकाशन के लिए वित्‍तीय सहायता का अनुरोध करता है तो परिषद् केवल अधिकतम 40,000/- रुपए तक की धनराशि उपलब्‍ध करा सकती है। उक्‍त वित्‍तीय सहायता का लाभ लेने के लिए यूएसए/यूके/कनाडा से अनिवासी संकाय सदस्‍यों की सहभागिता अनिवार्य है।

 

 

 

विकल्‍प (ख)

      अनिवासी संकाय सदस्‍यों की सहभागिता के साथ आयोजित किए जाने वाले सतत् चिकित्‍सा शिक्षा कार्यक्रम के लिए :

ठहरने, भोजन और आंतरिक यात्रा के प्रति, दौरा करने वाले भारतीय संकाय सदस्‍य को 25,000/- रुपए।

कार्यक्रम की कार्यवाही के प्रकाशन के प्रति, 15,000/- रुपए।

कार्यक्रम स्‍थल पर हाल और दृश्‍य-श्रव्‍य उपकरण किराए पर लेने के लिए, 10,000/- रुपए।

  1. अप्रतिपूर्तियोग्‍य मदें

पेय पदार्थों, एसटीडी और आईएसडी कॉलों आदि के लिए विदेशी/ भारतीय संकाय सदस्‍यों द्वारा किए गए व्‍यय।

अनिवासी/विदेशी/‍भारतीय संकाय सदस्‍यों द्वारा दर्शनीय स्‍थल देखने के लिए मेजबान संस्‍थानों द्वारा किए गए व्‍यय।

सचिवालयीय व्‍यय।

प्रतिपूर्तियोग्‍य मदों, जो ऊपर किए गए उल्‍लेख के अनुसार लागू हैं, के अलावा अन्‍य सभी विविध मदें।

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भारत में आयोजित किए जाने वाले सतत् चिकित्‍सा शिक्षा कार्यक्रमों/ कार्यशालाओं/ स्‍नातकोत्‍तर पाठ्यक्रमों में भाग लेने के इच्‍छुक विदेशी नागरिकों/ अनिवासी भारतीयों की पूर्व-अनुमति/पंजीकरण के संबंध में।

सं. भा.आ.प.-202(1)(सामान्‍य)/पंजीकरण-2010

सेवा में,

प्रधानाचार्य/डीन,

भारत में सभी चि‍कित्‍सा संस्‍थान/कॉलेज

  1. सचि‍व,

भारत में सभी मेडिकल एसोसिएशनें

  1. भारत में सभी अस्‍पताल

विषय: भारत में आयोजित किए जाने वाले सतत् चिकित्‍सा शिक्षा कार्यक्रमों/ कार्यशालाओं/ स्‍नातकोत्‍तर पाठ्यक्रमों में भाग लेने के इच्‍छुक विदेशी नागरिकों/ अनिवासी भारतीयों की पूर्व-अनुमति/ पंजीकरण के संबंध में।

 

 

महोदय/ महोदया,

आपका ध्यान भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद् अधिनियम, 1956 की धारा 14(1) की ओर आकर्षित किया जाता है,जो इस प्रकार है:-

  1. परिषद् के साथ विचार-विमर्श करने के पश्‍चात केंद्र सरकार, सरकारी राजपत्र में अधिसूचना द्वारा यह निर्देश दे सकती है कि भारत के बाहर के किसी देश में चिकित्‍सा संस्‍थानों द्वारा प्रदान की गई ऐसी चिकित्‍सा शैक्षिक योग्‍यताओं की मान्‍यता के लिए परस्‍पर व्‍यवस्‍था की कोई योजना लागू नहीं है, को इस अधिनियम के उद्देश्‍य के लिए चिकित्‍सा शैक्षिक योग्‍यताओं के रूप में मान्‍यता दी जाएगी या केवल तभी मान्‍यता प्राप्‍त होगी, जब एक विनिर्दिष्‍ट तारीख के पश्‍चात प्रदान की गई हों बशर्ते कि ऐसी शैक्षिक योग्‍यताएं रखने वाले व्‍यक्तियों द्वारा मेडिकल प्रैक्टिस:-
  2. की अनुमति केवल तभी दी जाएगी, यदि ऐसे व्‍यक्ति उस देश में तत्‍समय चिकित्‍सा व्‍यवसायियों के पंजीकरण को विनियमित करने वाले कानून के अनुसार चिकित्‍सा व्‍यवसायियों के रूप में नामांकित हों;
  3. उस संस्‍थान तक सीमित होगी, जिसके साथ वह अध्‍यापन, अनुसंधान या परोपकारी कार्य के उद्देश्‍यों के लिए तत्‍सयम संबद्ध है।
  4. सामान्‍य या विशिष्‍ट आदेश द्वारा केंद्र सरकार के द्वारा इस संबंध में विनिर्दिष्‍ट अवधि तक सीमित होगी।

उपर्युक्‍त को ध्‍यान में रखते हुए आपसे अनुरोध है कि कृपया यह सुनिश्चित करें कि सभी विदेशी नागरिकों/ अनिवासी भारतीय संकाय सदस्‍यों को भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद् से पूर्व-अनुमति प्राप्‍त करनी होगी, यदि वह भारत में मेडिकल कॉलेजों/ अस्‍पतालों/ मेडिकल एसोसिएशनों या किसी अन्‍य चिकित्‍सा संगठन द्वारा आयोजित किए गए किसी सतत् चिकित्‍सा शिक्षा कार्यक्रमों/ कार्यशालाओं/ स्‍नातकोत्‍तर पाठ्यक्रमों या किसी अन्‍य कार्यक्रम में किसी मरीज पर किसी नये यंत्र या किसी उपचार की कोई प्रक्रिया, हस्‍तक्षेप, सर्जरी, ड्रग थेरेपी, अनुप्रयोग करता/करती है/प्रदर्शित करता/करती है।

यह अनिवार्य है कि और गलती करने वाले मेडिकल कॉलेज/ संगठन के विरुद्ध भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद् द्वारा स्‍वत: प्रेरणा से कार्रवाई आरंभ की जाएगी।

धन्‍यवाद,

भवदीय,

(डॉ. पी. प्रसन्‍नाराज)

अपर सचिव